रविवार, 26 मार्च 2017

पवन दीवान


पवन दीवान
पवन नही ये अांधी है छत्तीसगढ का गांधी है
उन से रुबरू होने का मौक़ा मिला जब वो जेल मंत्री थे
तब मै भोपाल मे क्लास ११ वी में थी
वो धुँधली सी यादें है कि .....
वे सादा जीवन और उच्च विचार रखते थे
मंत्री पद पर भी कोई रुतबा नही दिखाते थे
सादा भोजन और ज़मीन मे ही बिछौना था
न कोई आडम्बर ना ही कोई दिखावा था
हमारे संत पवन दीवान जी एेसे थे....
सरलता उनकी हँसी में थी
उदारता उनकी व्यक्तित्व में था
वाणी में ओजस्व था
और बहुत अच्छे प्रवचन कर्ता थे
हमारे संत पवन दीवान जी एेसे थे....
न जाने वे इस लोक से परलोक में चले गये
पर अपनी अट्टहास हँसी यहॉ छोड़ गये
वे मरे नही अमर हो गये
उनकी सादगी भरी ज़िन्दगी के हम क़ायल हो गये
हमारे संत पवन दीवान जी एेसे थे....
स्वरचित
साधना शर्मा
कोरबा
७.३.१६


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