शनिवार, 25 मार्च 2017

मेरे आदर्श

                        


  मेरे आदर्श

आज के युग में युग पुरुष थे मेरे पापा
अपने उसूलों पर चलने वाले 
नही झुकते थे किसी के आगे
न्यायप्रिय सिद्धान्तवादी और आदर्शवादी थे
अनुशासन में रहते और हमें भी अनुशासित रखते
समाज के उत्थान में उनका बडा योगदान था
वे एक समाज सुधारक थे 
समाज के लिये एक उदाहरण थे
स्पष्टवादी और ख़ुदगर्ज़ थे 
भ्रष्टाचार के विरोधी थे
न खाते थे न खाने देते थे 
इस सिद्धांत को अपनाते थे
और इसलिये अच्छे अच्छे उनसे मिलने से कतराते थे
यही नही न्याय के लिये पहचाने जाते थे
हम उनके इन आदर्शो को कहॉ तक ले जा पायेंगे
पर कभी न कभी हम भी उसी राह पर आयेंगे
क्योंकि हम में भी उनका खुन बह रहा है
पर समाज को बदलने मे कुछ वक़्त तो लगता है
कुछ वक़्त तो लगता है।
ग़रीबों के मसीहा थे 
हर आने जाने वालों पर जान देते थे
पर यदि उनके उसूलों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाये 
तो उनकी एक न सुनते थे 
चाहे हम उनके कितने भी क़रीबी क्यों न हो
अब एक अध्याय का अंत हो गया 
पापा जी वहॉ चले गये 
जहॉ से कभी कोई लौट कर न आया 
पर उनकी हर बात अादर्श संस्कार 
हमारे बीच अमर हो गया अमर हो गया
हमें इतनी ताक़त दे कि हम उनके नाम को अमर कर सके
और उनके पद चिन्हों पर चल सके २
नमन नमन नमन 🙏🏻

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