रविवार, 26 मार्च 2017

नव वर्ष


नव वर्ष
हिन्दू नववर्ष की आगमन देवी की पूजा करते हम
हमारे संस्कार और संस्कृति के प्रतीक को पूजते हम
मॉ के चरणो में पहले नमन कर स्वागत करते है नववर्ष हम
नववर्ष हर बार दुगनी खुशियॉ लेकर आये
और चौतरफ़ा हो आनन्द की बौछार
बसंत बयार हो चहुँओर प्यार ही प्यार हो
नव वर्ष आया है ख़ुशियो भरा , सबको मिले अपार सफलता
नवल नवीन नव पल , सकारात्मक ऊर्जा से भर दे जीवन
हर तरफ उमंग हो हरियाली हो
जीवन में ख़ुशियाँ ही खुशियॉ भरी हो
नववर्ष में ये वादा करे कि पूरे करे अपने सपने
सपनो को साकार करे , और ये संकल्प ले
कि कोई दुखी और रंजिश न हो
हर्ष से बिताये हर वर्ष , कही न हो रंजों ग़म कही न हो रंजो ग़म
स्वरचित
साधना शर्मा
२५.३.१७


जीवन रक्षक


जीवन रक्षक

आओ लगाये एक पेड कर ले जीवन में कार्य नेक
पेड़ दे जीवन को साँस और ये है भोजन की आस
तरु की छॉव से पथिक को हो सुख का एहसास
न हो पेड़ पौधे , तो जीवन होगे दूर हमसे
ये  जीवन रक्षक और कवच है जीवन के
जो धूल धूप  से करती रक्षा और देती जीवन सुरक्षा
ये देते सुरक्षा बिना किसी अपेक्षा
हरियाली करती सबका मन हर्षित
पेड़ से हम सीखे जीवन दान करना वह भी निस्वार्थत
फिर भी हम अपने मतलब से उसे काटते और घरों को सजाते
कितना बड़प्पन है , कि फिर भी हमारे आगे नतमस्तक है
बस हम सब लगाये एक पेड़ , यही करते आशा आप सबसे
न कभी हम एक पाई देते पर वो देता है जीवन हमें
कभी तो अपने लिये सोच, लगाये एक पेड़
हमारे जाने के बाद भी होंगी हमारी यादें ,होगी हमारी यादें !
स्वरचित
साधना शर्मा
२५.३.१७


मेरा सपना


मेरा सपना
एम एल सी २३ वर्ष का युवा हो गया संघर्षो का मिसाल है
हज़ारों हज़ार सफल शिष्य दिये ये ख़ास है
इस संस्था को बच्चों की तरह बढ़ा किया
तभी तो यह यौवन की दहलीज़ पर खड़ा हुआ
इसे हमने साधना संघर्ष  और सश्रम से सींचा
और राष्ट्रपति भवन तक सफलता दिलाया
गॉव से लेकर अमेरिका में है इस संस्था के शिष्य
टाटा मोटर्स से लेकर आई बी एम तक नाम का डंका
ज़िला कार्यालय हो या गुगल सब जगह हमारे धुरंधर
हमें ज़रूरत पड़ी तो छत्तीसगढ़ी भाषा में भी पढ़ाये
इनके लिये हिन्दी में किताब लिखे और काम आसान किये
कोरबा में कम्प्यूटर का पर्याप बना और
लड़कियों को कम्प्यूटर शिक्षित किया
सपना है कि हमारा देश डिजिटल इंडिया बने,
इसके लिये हमें कुछ भी करना पड़े
ये देश हमारा है , इसके हम कुछ काम आये ये हमारी शान है


बाबू जी


बाबू जी
बाबूजी को प्रणाम आपकी कविता को सलाम
हम तो वही है जो भारत में थे
अपने वतन और ना ही अपनो को भूले है
हम जल्दी ही अपने भारत की धरती पर लौट आयेंगे
हॉ जहॉ सुरभि की महक ने बाँध रखा है
वही यहॉ की आभोहवा में एक नशा है
हमने यहॉ हर त्यौहार मनाये
जन्माष्टमी तीज गणेश चतुर्थी
मंदिर में सब मिल कर गाये भजन
और किये है प्रसाद ग्रहण
इस जगह पर है एक छोटा सा भारत है
जहॉ वह सभी कुछ (भौतिक सुख) है जो भारत में है
हॉ अपने थोड़े दूर जरुर हो गये है
पर जल्दी आप सबसे मिलते है
बस आप सबसे मिलने के इंतजार में
(
कुट्टु)
२२.९.१७


किटी


किटी
सहेली रिश्ते में बहुत ख़ास होती है
इस तरह हमारे किटी में २१ सहेली पास होती है
सब एक से बढ़ कर एक हुनर वाले
हर क्षेत्र में महारत हासिल करने वाले
इन का वर्णन हम इस तरह से करते
मीनू जान है किटी की मधु आन है किटी की
मंजू की समझदारी मधु की नादानी
मंजु की मधुर हँसी और मीना की धमाल हँसी
गोरी नारी रानी बातों की नही उधारी
मुनमुन की बिन्दी कोनिका की हिन्दी
श्वेता का ड्रेसींग सेंस सब को भाती उसका भेष
चंदन है सीधी सादी उसको खिलाने का शौक है भारी
भारती की नीली नीली आँखें भाती सबको उसकी बातें
गीता आजकल पोते में व्यस्त हो गयी हम सब से दूर हो गयी
रश्मि को महारत है तन और मन को स्वस्थ रखने का
लवलीन में है सादगी भरे जीवन जीने का
विभा है सरल मन की सब को अपना समझती
अनिशा का हँसमुख चेहरा सबको बना लेता अपना
शहनाज़ कभी रायपुर और कभी कोरबा में रहती फिर भी हम सब से मिलती रहती
अनिता करती सबका श्रृंगार सुनिता करती सबका इलाज
साधना को साधना ने पहुँचाया राष्ट्रपति भवन तक
इस तरह हमारे किटी में है एक से बढ़ कर एक मेम्बर
२१ के इस समूह की बात निराली हर कोई अपने आप में भारी
स्वरचित
साधना शर्मा
२८.६.१७

पवन दीवान


पवन दीवान
पवन नही ये अांधी है छत्तीसगढ का गांधी है
उन से रुबरू होने का मौक़ा मिला जब वो जेल मंत्री थे
तब मै भोपाल मे क्लास ११ वी में थी
वो धुँधली सी यादें है कि .....
वे सादा जीवन और उच्च विचार रखते थे
मंत्री पद पर भी कोई रुतबा नही दिखाते थे
सादा भोजन और ज़मीन मे ही बिछौना था
न कोई आडम्बर ना ही कोई दिखावा था
हमारे संत पवन दीवान जी एेसे थे....
सरलता उनकी हँसी में थी
उदारता उनकी व्यक्तित्व में था
वाणी में ओजस्व था
और बहुत अच्छे प्रवचन कर्ता थे
हमारे संत पवन दीवान जी एेसे थे....
न जाने वे इस लोक से परलोक में चले गये
पर अपनी अट्टहास हँसी यहॉ छोड़ गये
वे मरे नही अमर हो गये
उनकी सादगी भरी ज़िन्दगी के हम क़ायल हो गये
हमारे संत पवन दीवान जी एेसे थे....
स्वरचित
साधना शर्मा
कोरबा
७.३.१६


प्यारी सुरभि



प्यारी सुरभि

प्यारी सुरभि अब तुम छोटी सी से बड़ी हो गयी हो
पहले सब काम तुम्हारा मै करती थी
अब तुम अपना और सब का काम अकेले कर लेती हो
सुरभि अब तुम छोटी से .....
तुम को पहले मै तैयार करती थी अब तुम अपने से सज लेती हो
सुरभि अब तुम छोटी से ....
पहले तुम्हें मै पढ़ाती थी अब तुम खुद ही पढ़ लेती हो
और मुझे भी पढ़ा देती हो
सुरभि अब तुम छोटी से ......
पहले तुमको खाना बना कर मै खिलाती थी
अब तुम खाना बनाती भी हो और सब को खिलाती भी हो
सुरभि अब तुम छोटी से .....
पहले मै तुम्हें घुमाती थी अब तुम सब को घुमाती हो और मुझे भी घुमाती हो
सुरभि अब तुम छोटी से .....
पहले तुम्हारे जन्मदिन मे मै सबको बुलाती थी
अब जन्मदिन की तैयारी तुम्हें ख़ुद को करनी होती है
सुरभि अब तुम छोटी से.....
सुरभि अब तुम बड़ी हो गयी हो और मै बूढ़ी हो गयी हूँ
इस तरह तुम बढ़ी हो और और आगे बढ़ो और नयी नयी ऊँचाइयों को छुओ
मेरे हर काम को तुम कर रही हो तो तुम मेरे और मेरे से भी बेहतर काम करना और आगे बढ़ना
मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ होगा
मुझे गर्व है कि तुम मेरी सुरभि हो
प्यार और आशीर्वाद के साथ
तुम्हारी मॉ
😍😘😍😘😍😘😍😘😍😘😍😘😍😘😍😘
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२८.२.१६


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