वर्तमान में विश्व में कई प्रकार की सूचना तकनीक विकसित हो रही है परंतु इनमें सर्वाधिक असरदार तकनीक इंटरनेट है। इंटरनेट अलग-अलग भागों या जगहों पर लगे कम्प्यूटर को जोड़कर सूचना की आवाजाही के लिए बनाई गई विशेष प्रणाली है। कम्प्यूटर किसी भी सूचना को चाहे वह शब्दों में हो या ध्वनियों में फोटो में हो या दृश्यो में इसे अपनी अंकीय भाषा में परिवर्तित कर उन्हें इंटरनेट के माध्यम से प्रसारित कर देते हैं। दुनिया में कहीं भी इंटरनेट के जरियें सूचनाएं भेजी जा सकती है और उनका जवाब पाया जा सकता है। इंटरनेट के प्रयोग के लिए कम्प्यूटर सिस्टम के साथ-साथ टेलीफोन लाइन मोडम तथा उपयुक्त साफ्टवेयर जैसेः- TCP/IP, आदि की आवश्यकता होती है।
संपूर्ण विश्व में स्थित अलग-अलग कम्प्यूटर, LAN तथा VAN को आपस में जोड़ने वाले यंत्र इंटरनेट कहलाता है। इंटरनेट को नेटवर्क का नेटवर्क भी कहा जाता है। इंटरनेट अलग-अलग प्रकार से परिभाषित किया जाता है। जैसेः-
1. उसे फायर आप्टिकल टेलिफोन लाइन या उपग्रह माध्यम से जुड़े कम्प्यूटर का समूह कहते हैं।
2. इस कम्प्यूटर उपयोग के द्वारा विश्व में संदेश व सूचना के आदान-प्रदान का साधन कहते हैं।
3. इसे किसी समस्या के समाधान या निदान या आवश्यकता पड़ने पर संपूर्ण विश्व से सहायता प्राप्त करने का साधन है।
4. इस सूचना या जानकारी को तीव्रगति से संपूर्ण विश्व में वितरित करने का साधन कहते हैं।
5. इसे भविष्य का तकनीक, जिसके बिना जीवन की कल्पना भी असंभव होगी, कहते हैं।
6. इसे समय काटने या समय व्यर्थ करने का साधन भी कहते हैं।
इंटरनेट के संबंध में उपरोक्त समस्या तथ्य सत्य है, लेकिन इनमें से कोई भी पूर्ण नहीं है। आज इंटरनेट का परिदृष्य पूरी तरह से परिवर्तित हो चुका है। इंटरनेट को विज्ञान की प्रगति की सर्वोत्तम मिसाल माना जा रहा है। इसकी परिभाषा निम्न प्रकार हैः-
इंटरनेट एक विश्वव्यापी कम्प्यूटर नेटवर्क पर संग्रहित सूचना वितरित करने तथा विभिन्न कम्प्यूटर उपयोग कर्ताओं के मध्य सहयोग व संपर्क का माध्यम है। जिसके द्वारा बिना किसी धर्म या देश के भेदभाव के सूचनाओं का आदान-प्रदान करना संभव है।
यदि इंटरनेट कनेक्श्न लेना चाहते है तो हमें निम्न वस्तुओं की आवश्यकता होती हैः-
1. मोडम
2. टेलिफोन कनेक्श्न
3. ब्राउसर इंटरनेट एक्सपलोरर क्रोम
4. इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर
5. इंटरनेट कनेक्श्न
6. पीसी
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर
एक आई एस पी किसी यूजर को इंटरनेट एकाउंट व ई मेल एकाउंट प्रदान करता है अर्थात् ISP वे वेंडर है, जो किसी यूजर को इंटरनेट प्रयोग करने की अनुमति प्रदान करता है।
सामान्यतः यह सर्विस प्रदानकर्ता अपनी सर्विस का मूल्य लेते हैं परंतु कुछ सरकारी या शैक्षणिक संस्थाओं को निःशुल्क में सर्विस उपलब्ध कराते हैं। ISPNEP (Internet Service Provider Network Entry Point) या POP (Pointer of Presents) के माध्यम से किसी यूजर को इंटरनेट से जोड़ते हैं सामान्यतः प्रत्येक यूजर अपने कम्प्यूटर या अपनी कम्पनी में लगे हुए कम्प्यूटर को इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना चाहता है।
ISP के माध्यम से इंटरनेट access करने के विभिन्न तरीके निम्न हैंः-
1 Dedicated Connection (समर्पित कनेक्श्न)- यह एक लिस्ड लाईन, 56 KBPS या 64 KBPS या एक TL Link 1-544 MBPS को Corporate LAN/WAN के गेटवे कम्प्यूटर या Router/Bridge से जोड़ता या कनेक्ट करता है। यह इसे ISP के राउटर के साथ जोड़ता है।
2 On-Demand Connection: यह एक समर्पित लाइन की तरह ही होता है। लेकिन इसमें यूजर मॉडेम की सहायता से डायल अप करके ISP ;k ISDN नम्बर डायल करता है।
3 Dial Up Shell Account :- इस तरह के कनेक्श्न में एक यूजर कम्प्यूटर की सहायता से एक ISP कम्प्यूटर के साथ कनेक्ट होता है। यूजर को ISP कम्प्यूटर से डेटा मानवीय तरीके से डाउनलोड करना पड़ता है। यूजर X-Modem, Z-Modem ;k
Kermit protocol की सहायता से डाउनलोड करता है।
2 सीरियल लाईन इंटरनेट प्रोटोकॉल (Serial Line Internet Protocol(SLIP)) ;k
Point
To Point (PPP) Account : SLIP/PPP एक ऐसा एकाउंट है कि जब कोई यूजर इंटरनेट कनेक्श्न की मांग करता है, तब उसे SLIP/PPP A/c एकाउंट कहते हैं। यूजर के सारे एप्लीकेशन यूजर के कम्प्यूटर पर रन होती है।
1.Part Time Polled Connection:- यह कनेक्श्न UUCP पर आधारित है और एक यूजर संगठन को E-mail इत्यादि सुविधाएं ISP Dial Up कनेक्श्न के द्वारा समय अंतरालों पर प्रदान करती है।
ISP चुनने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना चाहियेः-
Speed:- इंटरनेट कनेक्श्न प्राप्त करते समय ISP द्वारा प्रदान की गई डेटा स्थानांतरण की दर ज्ञात करना एक महत्वपूर्ण बिंदु है अतः अधिकतम गति वाले इंटरनेट कनेक्श्न को लेना चाहिए।
Interface:- इंटरनेट से जुड़े हुए प्रत्येक कम्प्यूटर का इंटरफेस अलग-अलग होता है। प्रत्येक ISP हमारे कम्प्यूटर को एक अलग इंटरफेस प्रदान करता है। जैसेः- Graphical Interface, Menu Driven Interface. अतः इंटरफेस का चुनाव करना यूजर पर निर्भर करता है।
Storage Capacity:- ISP यूजर को एक निश्चित सीमा तक सूचनाओं को संग्रहित करने की सुविधा प्रदान करता है। अतः ISP का चुनाव करना चाहिए जो हमें अधिक संग्रहण क्षमता प्रदान करता है।
Software:- किसी कम्प्यूटर को किसी अन्य कम्प्यूटर से कनेक्श्न स्थापित करने के लिए कम्यूनिकेशन साफ्टवेयर निम्न हैः-
Technical Facilities:- किसी यूजर को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिस ISP से वह कनेक्श्न ले रहा है वह किस तरह की तकनीक सुविधाएं ISP द्वारा उपलब्ध कराए गए साफ्टवेयर कुछ तकनीकी सवाल आदि से संबंधित हो सकती है। भारत में निम्नलिखित कनेक्श्न हैंः-
यह इंटरनेट वर्क का संक्षिप्त रूप है यह असमान कम्प्यूटर नेटवेयर का एक सेट है जो गेटवे के द्वारा आपस में जुड़े रहते हैं तथा डेटा ट्रांसफर तथा संदशोa को भेजने वाले कम्प्यूटर के प्रोटोकाल से लक्ष्य कम्प्यूटर के प्रोटोकाल में परिवर्तन को नियंत्रित करते हैं। यह नेटवर्क तथा गेटवे TCP/IP प्रोटोकाल का उपयोग करते हैं। यह प्रोटोकाल मौलिक रूप से DARPA (Defence Advanced Research Project Agency) का हिस्सा थे । जो US के रक्षा विभाग द्वारा संचालित थे। इंटरनेट नेटवर्क का नेटवर्क कहलाता है यह TCP/IP का उपयोग करने वाले आपस में जुड़े नेटवर्क का सेट हैं।
इंटरानेट का प्राइवेट LAN है। जो इंटरनेट टेकनोलॉजी का उपयोग करती है। यह एक ऐसा नेटवर्क है, जो किसी कम्पनी या संगठनों में सूचनाओं के प्रोसेसिंग के लिए काम आता है। इसका उपयोग दस्तावेज बांटने, साफ्टवेयर बांटने, डेटाबेस एक्सेस करने और टेªनिग में होता है। इसका नाम इंटरानटे इसलिए है क्योंकि यह इंटरनेट से जुड़ी होती है जैसेः- वेबपेज वेब ब्राउजर एफ टी पी साईट ई मेल की एक्सेस को कम्पनी या संगठन के लिए काम में लगाता हैं |
Connectivity:- यदि इंटरनेट से जुड़ना है तो सर्वप्रथम हमें ISP से यूजर का नाम तथा पासवर्ड लेने होते हैं तभी इंटरनेट से जुड़ पाते हैं इंटरनेट से जुड़ने के लिए फोन लाईन को मोडम से जोड़ दिया जाता है इसके पश्चात विंडो डेस्कटॉप पर उपलब्ध कनेक्श्न पर डबल किल्क करते हैं यह प्रोग्राम कम्प्यूटर को ISP सर्विस से जोड़ने का प्रयास करता है। कभी-कभी कनेक्श्न जुड़ने में काफी समय लग जाता है। यदि कनेक्श्न ठीक प्रकार से जुड़ जाता है तब हमें स्क्रिन पर यूजर का नाम तथा पासवर्ड देना होता है इस तरह इंटरनेट से जुड़ पाते हैं और इंटरनेट एक्सपोलरर का उपयोग करके मनचाही साईट खोल सकते हैं।
1 . डायल अप कनेक्श्न:- यह एक ऐसी सर्विस है जिसे टेलिफोन की सुविधा उपलब्ध कराने वाली कम्पनी प्रदान करती है। इस सर्विस के माध्यम से लोकल क्षेत्र के एक्सचेंज पर स्थित स्वीच के साथ जुड़ जाते हैं इसके लिए उस एक्सचेंज का नम्बर डायल करना पड़ता है जो कि विभिन्न क्षेत्र के एक्सचेंज के लिए भिन्न-भिन्न होता है एक बार कनेक्श्न स्थापित हो जाने पर उपभोक्ता सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकता है। डायल अप सर्विस का प्रयोग टेलिफोन के माध्यम से इंटरनेट को एक्सेस करने के लिए किया जाता है। डायल अप को स्विचीग सर्विस भी कहते हैं। डायल अप के माध्यम से जो कनेक्श्न स्थापित होता है उसकी बैंड विडथ कम होती है, जो कि 0 से 400 htz होती है।
2. लिस्ड लाईन यह एक ऐसी सर्विस है जो कि उपभोक्ता के लिए पूरी तरह से समर्पित होती है तथा दूसरे उपभोक्ता के साथ हमेशा जुड़ी रहती है। यह कनेक्श्न टेलिफोन नेटवर्क में स्वीच के द्वारा स्थापित होता है। जो उपभोक्ता इस सर्विस को सबस्क्राइब करता है उसे ऐसा महसूस होता है कि उसके लिए एक कनेक्श्न लाईन उसी के कार्य के लिए समर्पित है क्योंकि स्वीच हमेशा बंद रहते हैं अतः कनेक्श्न स्थापित करने के लिए डायलिंग करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है लिस्ड लाईन की बैंड विडथ अधिक होती है। अतः उपभोक्ता ज्यादा डेटा को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेज सकता है लिस्ड लाईन को अधिकतर बड़े-बड़े संगठनों द्वारा प्रयोग में लाया जाता है।
3. वेरी स्माल एपरचर टर्मिनल :- संचार सेटेलाइट की दुनिया में यह एक नया विकास है। यह कम कीमत के माइक्रो स्टेशन होते हैं। जो वेरी स्माल एपरचर टर्मिनल VSAT कहलाते हैं। इन छोटे टर्मिनल में एक मीटर का एंटिना होता है और यह एक वॉट की पावर दे सकते हैं। अप लाईन साधारण तथा 19-2 Kbps के लिए अच्छा होता है लेकिन डाउन लिंक लगभग 512 Kbps होता है। ज्यादातर VSAT सिंटेकस में माइक्रो स्टेशन में र्प्याप्त ताकत नहीं होती कि वे सीधे एक दूसरे से सेटेलाइट के द्वारा बात कर सके। इसके बजाय एक स्पेशल ग्राउंड स्टेशन जिसे हब कहते हैं, जो कि एक उच्च स्तरीय एंटिना के साथ VSAT के बीच टेªफिक भेजने में आवश्यक होती है। इस तरीके में या तो भेजने वाले के पास या पाने वाले के पास शक्तिशाली एम्पलीफायर के साथ बड़ा एंटिना होता है। आजकल VSAT का प्रयोग काफी अधिक होने लगा है।
यू आर एल यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर :-यू आर एल इंटरनेट पर किसी रिसोर्स फाईल का सही ब्योरा देता है। वेब पेज प्राप्त करने के लिए यूजर को वेब पेज का पता ब्राउजर के पते वाले जगह पर टाईप करना पड़ता है। यू आर एल में अक्षर अंक आदि सम्मिलित रहते हैं। यू आर एल द्वारा किसी विशिष्ट वेब पेज ईमेज या टेक्स्ट फाईल को खोजा जा सकता है।www में उपलब्ध प्रत्येक रिसोर्स का एक अलग यू आर एल होता है। यू आर एल का ढांचा निम्न प्रकार का होता हैः-
Protocol:- //Server-Name.domain name
Level domain: port/Directory/File
Name
Example:-
पॉप और वेब आधारित ई मेल :- पॉप के माध्यम से सर्वर के द्वारा इजाजत देने पर हम अपना ई मेल सर्वर से टारगेट पते या अपने पीसी पर प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए POP के माध्यम से हम अपना ई मेल दी गई सूची में से नेटस्केप मैसेंजर पर प्राप्त कर सकते हैं। वेब पर आधारित ई मेल पर हमारे सारे ई मेल ई मेल एकाउंट में सर्वर पर सुरक्षित हो जाते हैं।
गुण :-
1. ई मेल के माध्यम से हम किसी भी व्यक्ति से बहुत जल्दी बातचीत कर सकते हैं। कोई भी ई मेल कुछ सेकेंड में अपनी पते पर पहुंच जाती है।
2. ई मेल अपने मित्रों व रिश्तेदारों से बातचीत करने का बहुत सस्ता तरीका है। ई मेल दूरी पर निर्भर नहीं करता है अर्थात् हम विश्व में कहीं भी किसी व्यक्ति को आसानी से ई मेल कर सकते हैं।
3. ई मेल भेजते समय कोई भी व्यक्ति या माध्यम अवरोध उत्पन्न नहीं कर सकता है।
4. ई मेल के माध्यम से पत्रए संदेशों के साथ-साथ डेटा फाईल फोटो तथा अन्य दस्तावेज भेज सकते हैं।
5. ई मेल भेजने वाले की ई मेल प्राप्त करने वाले व्यक्ति से किसी तरह का कोई एपाइंटमेंट नहीं लेना पड़ता है।
6. ई मेल संदेशों के खो जाने का डर नहीं होता है।
अवगुण :-
1. चुकि ई मेल एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर सिस्टम को किसी नेटवर्क के माध्यम से भेजा जाता है अतः किसी अन्य व्यक्ति की ई मेल को पढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
2. हम ई मेल के माध्यम से भाषाओं को व्यक्त नहीं कर सकते हैं।
3. ई मेल भेजने वाले व्यक्ति के ई मेल का नकली ई मेल का पता बनाया जा सकता है।
4. कुछ ई मेल सिस्टम में पिक्चर पेज को भेज पाने में असमर्थ होते हैं।
5. कोई भी ई मेल प्राप्त करने वाला ई मेल को रोक नहीं सकता है।
एड्रेसेस:- इंटरनेट पर ई मेल का पता निम्न रूप में प्रदर्शित होता है।
Local address@domain name Local address ई मेल पता का वह भाग है जो प्रयोगकर्ता के लॉग इन नाम को व्यक्त करता है।
डोमेन नाम किसी कम्प्यूटर का डोमेन नाम होता है जो प्रयोग के लिए ई मेल वहन करता है।
1. Mosaic:- यह एक जी यू आई ब्राउजर है जिसे NCSA द्वारा विकसित किया गया है। इस ब्राउजर को विंडो पर आधारित आपरेटिंग सिस्टम पर प्रयोग किया जाता है। NCSA Mosaic Window System 95 और 98 का एक उपभोक्ता प्रोग्राम है जिसे TCP/IP नेटवर्क के लिए प्रयोग किया जाता है। यह इंटरनेट का सबसे पहला सफल साफ्टवेयर है इसे NCSA द्वारा विकसित किया गया है।
i. Mosaic के माध्यम से हम उन स्त्रोतों तक पहुंच सकते हैं जो की URLको प्रदर्शित करते है।
ii. Mosaic के माध्यम से हम Home Page तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
iii. Mosaic के प्रयोग से हम USA नेट न्यूज को आसानी से पढ़ सकते हैं।
iv. E-mail भेज सकते हैं।
v. इसके माध्यम से कोई भी शब्द का वर्तमान दस्तावेज से ढूंढ सकते हैं।
vi. इसके माध्यम से अपने दस्तावेज को रिलोड कर सकते हैं।
vii. इसके माध्यम से अपने वर्तमान दस्तावेज को होस्ट लिस्ट में जोड़ सकते हैं।
viii.इसके प्रयोग से अपने खुले हुए दस्तावेज पर मूव कर सकते हैं।
ix. इसके माध्यम से वर्तमान Mosaic version के बारे में सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं।
x. इसके माध्यम से अपने Home Page में भी बदलाव कर सकते हैं
2. LYNX:- यह एक टेक्स्ट पर आधारित वेब ब्राउजर या साफ्टवेयर है। जो सूचनाओं का हापरटेक्स्ट में इंटरनेट पर प्राप्त करने में प्रयुक्त होता है। यह एक अच्छा ब्राउजर है जो University of Kanash Kansas में विकसित किया गया है। LYNX एक फुल स्क्रीन प्रोग्राम है। जिसका प्रयोग करना अत्यंत सरल है अन्य किसी ब्राउजर का प्रयोग करते समय हमे सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए स्क्रीन पर नीचे के लाईन में टाईप करनी होती है। लेकिन LYNX के प्रयोग से एक शब्द पर सूचनाएं प्राप्त हो जाती है।
Function
of LYNX:-
1. इसका प्रयोग पेज को पूरी तरह स्क्रीन पर देखने के लिए किया जाता है।
2. इसका प्रयोग दोबारा पहली कापी पर जाने के लिए किया जाता है।
3. इसके माध्यम से हम अगली लाईन हटा सकते हैं।
4. इसके माध्यम से हम पहली लाईन भी हटा सकते हैं।
5. किसी विषेश टेक्स्ट को ढूंढने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
6. किसी खोज को दोहराने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
7. इसका प्रयोग वर्तमान लिंक को चुनने के लिए किया जाता है।
8. इससे हम पिछले लिंक पर लौट सकते हैं।
3. Netscape Navigator:- यह बहुप्रचलित प्रोग्राम है। यह भी Mosaic की तरह कार्य करता है परंतु इसमें कुछ अतिरिक्त गुणों व सुधारों को शामिल किया गया है। यह जी यू आई सहित एक www ब्राउजर है जो विंडो वातावरण प्रदान करता है। इसको भी NCSA द्वारा विकसित किया गया है।
Function
of Netscape Navigator:-
1. अगर कोई पिछला दस्तावेज है तो उस पर यह पहुंचने का कार्य करता है।
2. इसी प्रकार अगला दस्तावेज पर पहुंचने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
3. यह प्रारंभिक होम पेज पर पहुंचने के लिए प्रयुक्त होता है।
4. वर्तमान दस्तावेज को रिलोड करने के लिए भी इसका उपयोग होता है।
5. एक या उससे अधिक शब्दों को ढूंढने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
6. लोडिंग रोकने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
4. Internet Explorer:- यह एक स्टैण्ड अलोन ब्राउजर है, जो इंटरनेट कनेक्शन के साथ कार्य करता है। यह इंटरनेट आइकन के द्वारा प्रदर्षित किया जाता है। इसे हम माइक्रोसाफ्ट की वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह एक बहुत प्रचलित ब्राउजर है।
कुछ अन्य बेव ब्राउजर जो प्रयोग किए जाते हैंः-
6. Spyglass Mosaic
सर्च इंजन :- सर्च इंजन एक प्रोग्राम है जो वेब पेज के माध्यम से वेबसाईट ढूंढने में मदद करता है। एक तरह से सर्च लोकेशन की स्पेस प्रदर्शित करता है जो हमारे प्रोग्रामर के हिसाब से मिलती जुलती है। अन्य शब्दों में सर्च इंजन एक प्रकार का वेब सर्वर है। जो कीबोर्ड के द्वारा मनचाही वेबसाइट को लोकेट करता है सर्च इंजन के माध्यम से सूचनाओं को प्राप्त करना अत्यंत सरल हो गया है। किसी भी नई वेब साइट का URL(Address) सर्च इंजन के पास जमा किया जाता है तथा वेब साइट के इंडेक्स पेज पर कीबोर्ड का निर्माण किया जाता है किसी भी वेबसाइट को सूची में आने के लिए 7 से 10 दिन तक का समय लग जाता है।
Submitaway.com एक ऐसी वेबसाइट है जो हमारा पता सर्च इंजन में सबमिट करने में मदद करती है। कुछ सर्च इंजन का एक निश्चित फार्मेट होता है और वह आशा करता है कि अपना कीबोर्ड के दोबारा टाइप करें और दूसरी तरफ कुछ सर्च इंजन केवल URLs की मांग करते हैं तथा वेबसाइट में कीबार्ड ले लेते हैं। जब हम अपने URL का उपयोग करके सर्च इंजन से जुड़ते हैं तब हमें सर्च बाक्स में एक या दो शब्द टाइप करने के लिए कहा जाता है। कुछ महत्वपूर्ण सर्च इंजन निम्नलिखित हैः-
1. www.yahoo.com:- यह एक पुराना व अधिक प्रचलित सर्च इंजन है जो कि इंटरनेट यूजर की पसंद की साइट प्रदान करता है।
2. www.iycos.com:- यह एक प्रभावशाली सर्च इंजन है। जो मनपसंद साइट प्रदान करता है इसको Carnegie Mellon University ने विकसित किया है।
3. www.infoseek.com:- यह एक अत्यंत प्रभावशाली सर्च इंजन है जो www को इच्छित सूचना के लिए सर्च करता है इसका एक गुण है 1. “Search Within Result”
4. www.execute.com:- यह एक चैटिंग करने के लिए लिंक प्रदान करता है।
5. www.hotbat.com:- इसके माध्यम से हम शब्द, भाषा तथा समय के आधार पर सूचना सर्च कर सकते हैं।
6. www.altawista-digital.com:- इस जैसे कुछ ही सर्च इंजन होते हैं जो विभिन्न भाषाओं में सूचनाअेां को सर्च करते हैं।
7. www.istents.com:- इसको मदर सर्च इंजन कहते हैं क्योंकि इसमें एक बार में 6 सर्च इंजन काम करते हैं।
8. www.goto.com:- यह एक सामान्य सर्च इंजन है जो अधिक दक्षता के साथ कार्य पूरा करता है।
9. ww.khoj.com:- यह एक भारतीय वेबसाइट का सर्च इंजन है जो भारतीय संस्कृति ओर परंपराओं की खोज होम पेज के माध्यम से करता है।
वेब को सर्च करना:-जैसे www तेजी से बढ़ रहा है तो यह आवश्यक हो जाता है की आसान और जल्दी वेब स्पेस ढूंढने के लिए अच्छा तरीका होना चाहिए। सर्च इंजन को इसी गति विधि के लिए विकसित किया गया है। सर्च इंजन के फ्रंट एण्ड पर इंडेक्स डेटाबेस होता है। जिस कीबोर्ड को खोजना है उसे टाइप करना होता है। विशय क्रमोदेश की सूची को वर्चुअल लाइब्रेरी लिंक लाइब्रेरी विषय इंडेक्स और सर्चेबल डायरेक्ट्रीस भी कहते हैं यहां पर अनेक सर्च इंजन विषय क्रमोंदेष सूची अथवा कीबोर्ड का उपयोग करते हए सूचनाएं प्राप्त करते हैं इंटरनेट पर सूचनाओं को व्यस्थित करने के लिए फाईल बना कर उनको एकत्रित करने का एक तरीका है उनके अंतर्वस्तु के द्वारा लिंक की सूची होती है। वेबपेज के वर्गों को या तो वेबपेज के लेखक के द्वारा या विषय ट्री के प्रशासक के द्वारा निरूपित किया जाता है।
सर्च इंजन “Feature Index कम्प्यूटर प्रोग्राम ” द्वारा स्वतः कम्पाइल हो जाते हैं। जैसे रोबोट व स्पाइडर इंटरनेट पर जाकर खोजते और स्त्रोतों को एकत्रित करते हैंः-
वेब सर्च करने के लिए निम्नलिखित सर्च इंजन को प्रयोग में लाया जाता हैः-
HTTP हायपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल:-HTTP एक स्टैर्ण्ड वेब ट्रांसफर प्रोटोकॉल है। इसके प्रत्येक परस्पर संबंध में एक ASCII अनुरोध होती है। यह एक RFC 822 MIME Line के द्वारा अनुसरण का एक जवाब है यह सामान्य और स्टैर्ण्ड के लिए उपयोग नहीं होता है। अधिकतर वेबपेज HTTP के साथ अभिगमन करते हैं। वेब संचार की भाषा है इसलिए वेब पता HTTP के साथ शुरू होता है।
यह एक प्रोटोकॉल है जो नियमों का समूह है तथा यह दो या दो से अधिक कम्प्यूटर के मध्य हायपर टेक्स्ट के स्थानांतरण का सन करता है। हायपर टेक्स्ट एक ऐसा टेक्स्ट है जो विशिष्ट कोड द्वारा तैयार किया जाता है। HTTP उपभोक्ता सर्वर प्रिंसपल पर आधारित है।
यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर URL (Uniform Resource Locator):-उसकी इंटरनेट पर सुरक्षित जगह पर फाइल होती है। किसी भी तरीके का उपयोग कर वेब पेज खोल सकते हैं। वेब ब्राउजर के पते और लोकेशन बाक्स में URL का प्रवेश कराते हैं। इंटरनेट एक्सपलोरर और नेविगेटर स्वतः समाप्त होने का गुण रखता है। ब्राउजर यह अनुमान लगाने की कोशिश करता है कि हम क्या URL type टाईप कर रहे हैं ओर इसे कब समाप्त करना है।
वेब सर्वर :-.वेब पर HTML को डिस्प्ले करने से पहले इसको वेब सर्वर से अभिगमन करने की आवश्यकता होती है। यह आवश्यक है कि इंटरनेट से तथा वेब ब्राउजर वेब सर्वर से संबंध प्राप्त करे यह वेब सर्वर का कार्य है। जब ब्राउजर निवेदन करे तो HTML लेखों को भेज दे । यह कार्य HTML प्रोटोकॉल द्वारा किया जाता है। वेब सर्वर इंटरनेट संबंध के साथ एक समान्य कम्प्यूटर है जो साफ्टवेयर को रन करता है तथा वह HTML लेखों तथा फाईल को भेजने का कार्य करता है।
वेब प्रोटोकॉल :-
1 . HTTP:- www अभिगमन करने के लिए उपभेक्ता/सर्वर प्रोटोकॉल का उपयोग करते हैं सर्वर/ उपभेक्ता पर दस्तावेज कुछ विशिष्ट नियमो का पालन करके ही भेजे जाते हैं। इन नियमों को प्रोटोकॉल कहते हैं। वह प्रोटोकॉल जिसमें www कार्य करता है HTTP कहलाता है। यह दस्तावेज को एक कम्प्यूटर से दूसरे पर भेजता है ओर सभी हायपर टेक्स्ट पर लिखे होते हैं।
2. हायपर टेक्स्ट :-.वेब के संयोग से दोनों कठिन और नान सिक्वेशनल टेक्स्ट को एक साथ जिसकों उपयोगिता संबंधित टॅापिक के द्वारा ब्राउजर कर सकते हैं। इस हायपर टेक्स्ट कहते हैं। यह हायपर टेक्स्ट टर्न 1995 में आया जिसमें फिल्मए किताबों और स्पीच के रेखीय विचार के विरोध में कम्प्यूटर द्वारा अरेखीय संरचना को प्रगट करने के लिए लेखों को वर्णित किया गया था।
3. हायपर टेक्स्ट मार्क अप लैंगवेज :- यह हायपर टेक्स्ट लेखों को बनाने के लिए साधारण मार्कअप भाषा का प्रयोग करते हैं। जिसमें इन लेखों को एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर तक ले जाया जा सकता है। यह साधारण HTML फाइल होती है। जिसमें हायपर टेक्स्ट लिंक के साथ कोड लिखा हुआ होता है। www पर लेख के लिए फार्मेटिंग भाषा का प्रयोग होता है।
संकल्पना :- हमारे पास पहले से ही दस्तावेज का संग्रह होता है। इन्हें HTML में परिवर्तित करने हेतु बहुत सारे उपाय होते हैं, इस परिवर्तन के लिए कई अनुप्रयोग किए जाते हैं। उदा:-कोरल वेब डेटा डेटाबेस फाईल को HTML फाईल में परिवर्तित करता है। इसका फार्मेट http://www.coreldraw.com इसी प्रकार वेब प्रकाशक विभिन्न टेक्स्ट फार्मेट को HTML में परिवर्तित करता है। वेब प्रकाशन एक्सेल या पावर पावइंट अनुप्रयोगों की फाईल को HTML फाईल में परिवर्तित करने के साथ साथ निम्न कार्य भी करता है।
1. फाईल को बैच में परिवर्तित करना।
2. बटन का निर्माण करता है। जिससे एक HTML पेज से दूसरे HTML पेज पर पहुंचा जा सकता है।
3. ग्राफिक इमेज का जी आई एफ फार्मेट में परिवर्तित करता है।
4. पहले से उपस्थित सारणियों में लिंक बनाता है।
उपरोक्त कार्य वेब प्रकाशन द्वारा किए जाते हैं। इस प्रक्रिया को वेब प्रकाशन कहते हैं।
डोमेन नाम रजिस्ट्रेशन :- जब किसी व्यक्ति या कम्पनी को अपनी साइट इंटरनेट पर डिस्प्ले करनी होती है तो इसके लिए उस कम्पनी को डोमेन नाम को रजिस्टर करना पड़ता है। जो यह दर्शाता है कि वह साइट कमर्शियल या एजुकेशनल है। डोमेन नाम की सुविधा कई कम्पनी इंटरनेट साईट के माध्यम से उपलब्ध कराती है। किसी भी उपभोक्ता को अपनी साईट इंटरनेट पर डिस्प्ले करने के लिए उसे डोमेन नाम को रजिस्टर कराना पड़ता है। इसकी सुविधा इंटर NIC द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इसका कार्य हमारी साइट को रजिस्टर करने के लिए होता है। वह साईट कहां पर स्टोर होगी, यह सब वह कम्पनी को उपलब्ध कराती है। जो हमारी साईट को स्टोर करने के लिए मेमोरी उपलब्ध कराती है। यह हम पर निर्भर करता है की हम किस कम्पनी का चुनाव करते हैं। आजकल कई इंटरनेट कम्पनी उपभोक्ताओं के जरूरतों के अनुसार अपने सर्विस पर उपभोक्ताओं की साईट को रखने के लिए जगह उपलब्ध कराती है। इस सुविधा के लिए वह अपने उपभोक्ताओं से कुछ मूल्य लेती है। डोमेन नाम रजिस्टर कराते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिएः-
1. रजिस्ट्रेशन के लिए कितना मूल्य अदा करना पड़ता है।
2. प्रयोग करनेे के लिए कितनी फ्री डिस्क उपलब्ध है।
3. फ्री लिमिट समाप्त होने पर प्रति एम बी स्थान प्राप्त करने के लिए कितना मूल्य अदा करना पड़ रहा है।
4. विभिन्न तकनीकी सहयोग उपलब्ध है या नहीं ।
5. किसी उपभोक्ता की सूचनाओं को कितनी सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि कोई अन अथोराईज व्यक्ति उन सूचनाओं का प्रयोग न कर सके।
डोमेन नाम रजिस्ट्रेशन के लिए हमें अपनी साईट को रजिस्ट्रर कराना पड़ता है। यह कार्य 24 घंटे से 72 घंटे में समाप्त हो जाता है। जिससे सूचना ई मेल पर उपलब्ध कराई जाती है। इस कार्य के मूल्य का भुगतान उपभोक्ता को क्रेडिट कार्ड नम्बर की सहायता से होता है। बिना क्रेडिट कार्ड से हम रजिस्ट्रेशन नम्बर प्राप्त कर सकते इसके पश्चात् हम अपनी फाईल को कम्पनी के सर्वर पर भेज सकते हैं। फाईल सर्वर पर स्टोर होने पर हमारे डोमेन नाम की सहायता से इंटरनेट पर उपलब्ध हो जाती है।
वेब साईट के लिये होस्ट सर्वर में जगह :-आजकल कई कम्पनी अपने सर्वर पर उपभोक्ताओं के लिए स्थान उपलब्ध कराती है। जिस सर्वर पर यह स्थान उपलब्ध होता है। उसे होस्ट सर्वर कहते हैं। जो कम्पनी यह स्थान अपने सर्वर पर उपलबध कराती है वह उपभोक्ताओं से कुछ मूल्य लेती है। यह कम्पनी कई तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। जैसे किः- साफ्टवेयर तकनीकी सहयोग आदि।
किसी भी व्यक्ति या कम्पनी को जो इस र्स्विस का उपयोग करना चाहते हैं। इस बात का विषेश ध्यान रखना चाहिए कि वह कम्पनी में कितना फ्री स्पेस उपलब्ध करा रही है तथा उसके साथ कौन-कौन तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तथा यह कितनी सुविधा प्रदान कर रही है। एक बार जब हम अपनी साईट का रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं। इसके पश्चात् अपनी साईट की फाईल को होस्ट सर्वर पर स्टोर कर सकते हैं। इसकेपश्चात् इंटरनेट के माध्यम से साईट को एक्सेस कर सकते हैं। कुछ साईट जो अपने सर्वर पर स्थान उपलब्ध कराती है। निम्नलिखित हैः-
<html>
<head>
<title>
First web Page </title>
</head>
<body>
<p>
This is My First Web Page </p>
</body>
</html>
Example 1
Example 3 Web Page Underline Italic Bold
</html>
Example 4 Web Page Horizontal Line
</html>
Example 5 Web Page Alignment (Center, Right, Left)
</html>
Example 6 Web Page Font Color Size Face
</html>
Example 7 Web Page Back Ground Color & Text Color
</html>
Example 8 Web Page Super Script & Sub Script
</html>
Example 9 Web Page Strike & Pre Tag
</html>
Example 10 Web Page with Heading
<html>
</html>
Example 11 Web Page Marquee Text
<html>
</html>
Example 12 Web Page Marquee Text Scroll
<html>
</html>
<html>
</html>
Example 14 Invoke hello.html( You write here your system's file name)
</html>
Example 24 Adding a TEXT BOX
<Head>
<Title>Working with Table </Title>
</Head>
<Body Bgcolor="Lightgrey">
<B>Specifying Rowspan and Colspan Attributes! </B>
<BR><BR<BR>
<Center>
<Table Border=2 cellpadding=3 Align=Center>
<TR>
<TH Rowspan=2>Name of Trains
<TH Rowspan=2>Place
<TH Rowspan=2>Destination
<TH Colspan=2>Time
<Th Rowspan=2>Fare </TR>
<TR>
<TH>Arrival
<TH> Departure
</TR>
<TR align=Center>
<TD>Rajdhani Express
<TD>Bombay
<TD>Delhi
<TD>07:30
<TD>08:45
<TD>Rs.989.00
</TR>
<TR align=Center>
<TD>Madras Mail
<TD>Bombay
<TD>Madras
<TD>09:00
<TD>10:15
<TD>Rs.450.00
</TR>
<TR align=Center>
<TD>Konya Express
<TD>Bombay
<TD>Banglore
<TD>11:30
<TD>12:25
<TD>Rs.645.05
</TR>
<TR align=Center>
<TD>Konkan Express
<TD>Bombay
<TD>Mangalore
<TD>13:30
<TD>14:45
<TD>Rs.756.00
</TR>
<TR align=Center>
<TD>Deccan Express
<TD>Bombay
<TD>Madras
<TD>13:30
<TD>14:45
<TD>Rs.756.00
</TR>
<Caption Align=Top><B>
<BR>Railway Time Table </B></Caption>
</Table>
</Center>
</Body>
</Html>
Example 31 Ordered Unordered and Definition List
<Head>
<Title>Lists</Title>
</Head>
<Body>
<B>Example on Unordered Lists</B>
<UL type=Fillround>
<LI>PGDCA
<LI>DCA
<LI>BCA
</UL>
<B>Example on Ordered Lists</B>
<OL type="i" Start=4>
<LI>PGDCA
<LI>DCA
<LI>BCA
</OL>
<B>Example on Defination Lists</B>
<DL>
<DT>Course I
<DD>PGDCA
<DT>Course II
<DD>DCA
<DT>Course III
<DD>BCA
</DL>
</Body>
</Html>
Example 32 Table with colored Cell
<HTML>
<Head>
<Title>Working with Cell Color</Title>
</Head>
<Body Bgcolor=Lightgrey>
<B>Specifying Colored Table Cells! </B>
<BR><BR<BR>
<Center>
<Table Border=1 width=50% Align=Center>
<TR>
<TH bgcolor=Gray>NAME</TH>
<TH bgcolor=Gray>AGE</TH>
</TR>
<TR align=Center>
<TD bgcolor=red><Font Color=White>Sita </Font></TD>
<TD bgcolor=violet><Font Color=Red>25</Font></TD>
</TR>
<TR align=Center>
<TD bgcolor=blue><Font Color=White>Gita </Font></TD>
<TD bgcolor=red><Font Color=Blue>22</Font></TD>
</TR>
<Caption align=Bottom><B><BR>
Personal Information
</Caption>
</Table>
</Center>
</Body>
</Html>
Example 33 Frameset (give name of your system's files )
<Html>
<Head>
<Title>Frame set </Title>
</Head>
<Frameset Rows="60,20,10">
<Frame src="E:\Mlccollege.gif" marginheight=0 marginwidth=0
name="Frame1">
<Frameset cols="25%,25%,40%">
<Frame src="e:\html & css\Chapter4.html" Name="Frame2">
<Frame src="e:\html & css\Chapter5.html" Name="Frame3">
<Frame src="e:\html & css\Chapter6.html" Name="Frame4">
</Frameset>
</Frameset>
</Html>
Example 34 for pull down menu in java script
<html>
<head>
<title>dropdown menu using select tab</title>
</head>
<script>
function favTutorial()
{
var mylist = document.getElementById("myList");
document.getElementById("favourite").value = mylist.options[mylist.selectedIndex].text;
}
</script>
<body>
<form>
<b> Select you favourite Computer Language using dropdown list </b>
<select id = "myList" onchange = "favTutorial()" >
<option> ---Choose Language--- </option>
<option> C </option>
<option> C++ </option>
<option> VB .Net </option>
<option> HTML Coding </option>
</select>
<p> Your selected Language is:
<input type = "text" id = "favourite" size = "20" </p>
</form>
</body>
</html>
Example 35 for CSS coding
<html>
<head>
<style>
body
{
background-color: powderblue;}
h1
{
color: blue;
}
p
{
color: red;
}
</style>
</head>
<body>
<h1>This is a heading</h1>
<p>This is a paragraph.</p>
</body>
</html>This is my First Page
Example 36 for CSS coding
<html>
<body style="background:skyblue">
<div style="width:90%; min-height:600px; background:white; margin:auto; border-radius:5px;">
<div style="height:70px;text-align:center ; border-bottom:5px solid red;"> Hello Top </div>
<div style="height:460px; width:20%; border-left:1px solid red; float:left;"> Left Block </div>
<div style="height:460px; width:79.8%; background:blue; float:left;">
<div style="width:150px; height:150px;text-align:center; background:yellow; float:left; margin:15px;">A </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="width:150px; height:150px; background:yellow; float:left; margin:15px;"> </div>
<div style="clear:both;"> </div>
</div>
<div style="clear:both;"> </div>
<div style="height:70px; background:grey;"> footer Section </div>
</div>
</body>
</html>
Example 37 Program of Adding two numbers
<html>
<head>
<title>Add two numbers </title>
</head>
<script>
const num1 = parseInt(prompt('Enter the first number '));
const num2 = parseInt(prompt('Enter the second number '));
//add two numbers
const sum = num1 + num2;
// display the sum
//console.log(`The sum of ${num1} and ${num2} is ${sum}`);
document.write("sum=" +sum);
</script>
</html>
Example 38 Adding of Three Numbers
//Adding of three numbers
<html>
<head>
<title>Add two numbers </title>
</head>
<script>
const num1 = parseInt(prompt('Enter the first number '));
const num2 = parseInt(prompt('Enter the second number '));
const num3 = parseInt(prompt('Enter the third number '));
//add two numbers
const sum = num1 + num2 + num3;
// display the sum
//console.log(`The sum of ${num1} and ${num2} is ${sum}`);
document.write("sum=" +sum);
</script>
</html>
Example 39 Create Table
PROJECT WORK
NAME : RAM
COURSE : PGDCA/DCA
MO. NO. : 91******00
CODING
<Html>
<Head>
<Title>PURCHASE GST INVOICE SUNDRY CREDITORS</Title>
</Head>
<Body
bgcolor="lightblue">
<b>Specifying
rowspan and colspan attributes ! </b>
<br><br><Br>
<center>
<table
border=1 cellpadding=3 align=center>
<tr>
<TD
BGCOLOR="YELLOW"> Bills No </td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW"> Party Name</td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW">Group</td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW">Items Name</td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW">GST Rate</td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW">Quantity</td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW">Rate</td>
<TD
BGCOLOR="YELLOW">Remark</td>
<tr
align=center>
<td>1
<td>Raj
Computer State-UP
<td>Computer
Parts
<td>
Mouse
<br>
Keyboard
<br>
USB Hub
<br>
Moniter
<td>
18%
<br>
18%
<br>
18%
<br>
18%
<td>
10pcs
<br>
10pcs
<br>
15 pcs
<br>
8 pcs
<td>
75 rs
<br>
150 rs
<br>
25rs
<br>
4500 rs
<td>
CGST 50%
<br>
SGST 50%
</tr>
<tr
align=center>
<td>2
<td>Sharma
pvt ltd State-UP
<td>Edigble
Items
<td>
Suger
<br>
Oil
<br>
Rice
<br>
Namkeen
<td>
5%
<br>
5%
<br>
5%
<br>
5%
<td>
500 Kg
<br>
80 ltr
<br>
800 Kg
<br>
5 Kg
<td>
40 rs
<br>
90 rs
<br>
45 rs
<br>
90 rs
<td>CGST
50%
<br>
SGST 50%
</tr>
<tr
align=center>
<td>3
<td>XYZ
Electronics State-UP
<td>Electrical
Items
<td>
Fan
<br>
LED Bulb
<br>
Table Fan
<br>
Cooler
<td>
18%
<br>
18%
<br>
18%
<br>
18%
<td>
65 Pcs
<br>
70 Pcs
<br>
14 Pcs
<br>
5Pcs
<td>
120 rs
<br>
85 rs
<br>
250 rs
<br>
2500 rs
<td>CGST
50%
<br>
SGST 50%
</tr>
<tr
align=center>
<td>4
<td>Jain
Stationary State-UP
<td>Stationary
<td>
Note Book
<br>
Pencil
<br>
Writing Pads
<br>
Markers
<td>
18%
<br>
12%
<br>
18%
<br>
12%
<td>
100 Pcs
<br>
150 Pkt
<br>
20 box
<br>
25 Pcs
<td>
25 rs
<br>
4 rs
<br>
25 rs
<br>
30 rs
<td>CGST
50%
<br>
SGST 50%
</tr>
<caption
align=top><br>
<br>Purchase
GST Invoice Sundry Creditors</b></caption>
</Tables>
</Center>
</Body>
</Html>